नीतीश के पीएम वाले सपने में केसीआर ने ही लगा दिया पलीता, जानिए कैसे

बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन की सरकार बनते ही नीतीश कुमार को उनकी पार्टी और सरकार में सहयोगी आरजेडी ने पीएम मटेरियल बताना शुरू कर दिया था। इस दिशा में शुरुआती पहल के बाद नीतीश ने तब से चुप्पी साध ली है, जब से कांग्रेस ने राहुल गांधी को पीएम फेस बताना शुरू किया है। इस बीच तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पार्टी टीआरएस (TRS) का नाम बदल कर नयी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) की औपचारिक घोषणा कर दी। बुधवार को खम्मम में इसको लेकर उन्होंने एक सम्मेलन बुलाया, जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान सिंह, केरल के सीएम पिनाराई विजयन और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव शिरकत कर रहे हैं। नीतीश कुमार देखते रह गये और केसीआर ने तीसरे मोर्चे की नींव रख दी। महागठबंधन के सर्वमान्य नेता के रूप में वह बिहार के सीएम तो बन गये हैं, लेकिन महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान में ही वे इस कदर उलझे हैं कि पीएम बनना तो दूर, उनके सीएम बने रहने पर ही सवाल उठ रहे हैं। यानी नीतीश कुमार यहां भी मात खा गये। उन्होंने यह जरूर कहा है कि विपक्षी एकता की पहल के लिए वह फरवरी बाद निकलेंगे। पर, अब निकल कर भी वह कौन सा तीर मार लेंगे!

लालू ने पीएम बनने का नीतीश को दिखाया था सब्जबाग

महागठबंधन के साथ नीतीश के आने के साथ ही आरजेडी के नेता लालू प्रसाद ने उन्हें पीएम बनने का सब्जबाग दिखाया था। इसके लिए नीतीश के सामने विपक्ष को एकजुट करने का टास्क था। वह लालू के साथ सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली भी गये। सोनिया से उनकी मुलाकात भी हुई, लेकिन कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। उसके बाद तो आरजेडी कैंप से लगातार उनको उकसाया जाता रहा कि विपक्ष को गोलबंद करने के लिए अब उन्हें देश के दौरे पर निकलना चाहिए। इस बीच कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ऐलान कर दिया कि राहुल गांधी ही कांग्रेस की ओर से पीएम का फेस होंगे। नीतीश की उम्मीदों पर पानी फिर गया और वे देश के बजाय बिहार के दौरे पर निकल गये। हालांकि उन्होंने कहा है कि फरवरी में बजट सत्र खत्म होने के बाद वह विपक्ष को एकजुट करने के प्रयास में लगेंगे।

सोनिया के बाद केसीआर ने भी नीतीश को दिखाया आईना

सोनिया गांधी ने पहले ही नीतीश कुमार को आईना दिखा दिया था, अब तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने भी उन्हें झटका दे दिया है। वामपंथी सीएम विजयन, आप के दो सूबों के सीएम अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान सिंह के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को अपने सम्मलेन में जुटा कर केसीआर ने चार विपक्षी दलों के एक मंच पर जुटाने का संकेत दे दिया है। बिहार के महागठबंधन में आरजेडी-जेडीयू के अलावा वामपंथी दल हैं। केरल के वामपंथी सीएम के केसीआर संग जाने के बाद यह साफ हो गया है कि बिहार के वामपंथी भी पीएम पद की रेस में नीतीश का साथ छोड़ सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि नीतीश में पीएम बनने के सारे गुण देखने वाला जेडीयू और उन्हें पीएम बनाने को बेचैन आरजेडी के अलावा समय आने पर नीतीश के साथ कोई नहीं होगा। कांग्रेस ने तो पहले ही पल्ला झाड़ लिया है। ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा तो उसी समय उजागर हो गयी थी, जब तीसरी बार सीएम बनते ही उन्होंने गैर कांग्रेस विपक्षी दलों के मोर्चे की आवाज उठायी थी। नोबेल पुरस्कार जीतने वाले अमर्त्य सेन ने हाल ही में ममता के भीतर पीएम बनने के सारे गुण होने की बात कह कर उनकी महत्वाकांक्षा में एक बार फिर पलीता लगा दिया है।

नीतीश कुमार महागठबंधन की खींचतान में ही उलझे हैं

महागठबंधन में पिछले कुछ दिनों से शुरू हुई खींचतान उफान पर है। आरजेडी के एक विधायक सुधाकर सिंह ने नीतीश के लिए जिन विशेषणों का इस्तेमाल किया, उससे जेडीयू में भारी नाराजगी है। हालांकि आरजेडी ने सुधाकर को नोटिस देते हुए पखवाड़े भर में जवाब मांगा है कि महागठबंधन के नेता के बारे में उनके बयान के लिए क्यों न कार्रवाई की जाये। अभी यह मामला चल ही रहा था कि नीतीश मंत्रिमंडल में आरजेडी कोटे के मंत्री चंद्रशेखर ने हिन्दुओं को आहत करने वाला बयान देकर हड़कंप मचा दिया। नीतीश समेत जेडीयू के तमाम बड़े नेता मंत्री से बयान के लिए माफी मांगने की मांग कर रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग आरजेडी से कर रहे हैं। उधर मंत्री अपने बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं। नीतीश ने कैबिनेट मीटिंग में जब इस बारे में उनसे पूछा तो मंत्री का जवाब था कि वह आगे भी ऐसा बोलते रहेंगे। इस खींचतान में नीतीश कुमार इस कदर उलझे हैं कि अब विपक्षी एकता की पहल की बात ही गायब है।

केसीआर की रैली में शामिल हो रही सपा, आप

केसीआर की खम्मम रैली की उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें उनकी पार्टी के अलावा तीन अन्य पार्टियों ने भागीदारी की। आम आदमी पार्टी, सीपीएम और समाजवादी पार्टी के शीर्ष पर्सनाल्टी सम्मेलन में आये। अकेले किसी सीएम का चार राजनीतिक दलों का समर्थन विपक्षी एकता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा भी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस दल की सर्वाधिक सीटें होंगी, पीएम उसी दल का बनेगा। रमेश के बयान को ही आधार मान लिया जाये तो बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। सात दलों का महागठबंधन है। यानी नीतीश के पीएम बनने का आधार ये 40 सीटें ही फिलहाल दिख रही हैं। वह भी तब, जब सभी सीटें महागठबंधन को मिलें। अगर विजयन जैसे वामपंथी सीएम केसीआर के साथ खड़े हैं तो दूसरे वामपंथी दल नीतीश के साथ खड़े होंगे, इसमें संदेह ही है।

लालू ने नीतीश को केंद्र की राजनीति में जाने की सलाह दी है

महागठबंधन के साथ नीतीश के जुड़ने के वक्त ही लालू प्रसाद यादव ने कह दिया था कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में जाएंगे। वे विपक्षी दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट करेंगे। उसके बाद बिहार के सियासी फिजां में यह चर्चा चलती रही कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में जाएंगे। जेडीयू के लोगों ने भी कहा कि नीतीश पीएम मटेरियल हैं। पीएम बनने के सारे गुण उनमें मौजूद हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार जो काम पहले करते हैं, वही काम दूसरे बाद में करते हैं। हाल के दिनों में आरजेडी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भी यह कह कर हवा दे दी कि नीतीश कुमार जरूर पीएम बनेंगे। उन्हें लालू प्रसाद यादव का आशीर्वाद है। लालू ने उन्हें विजय का टीका लगा दिया है। अपनी बात पुख्ता करने के लिए उन्होंने इंद्र कुमार गुजराल और एचडी देवगौड़ा के नाम भी गिनाये। उन्होंने कहा कि लालू के आशीर्वाद से ही दोनों पीएम बने थे। जगदानंद सिंह इस बयान पर कोहराम मचा। जेडीयू के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार को किसी के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है। उन्हें जनता का आशीर्वाद पहले से ही मिला हुआ है। जन आशीर्वाद से ही वह पीएम बनेंगे, किसी नेता के आशीर्वाद से नहीं।

 

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