ज्ञानव्यापी संघर्ष के पीछे किन शक्तियों का हाथ रहा है इसे पहले पावदान तक सफलता पूर्वक पहुंचाने में

एक नायक वकील विष्णु जैन रहे जिनके साहस के कारण मुकदमा यहां तक पहुंचा. ये वही वकील है जिन्होंने कुतुबमीनार से मूर्ति हटाने के ASI फतवे पर रोक लगाई. यही वकील वक्फबोर्ड के खिलाफ भी कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे है.

वर्षो से चले आ रहे संघर्ष को आज अंततः पहली मंजिल मिल ही गई. आज ज्ञानव्यापी में हुए निर्विघ्न सर्वे का श्रेय 7 नायकों को जाता है जिनमें पांच नायक प्रत्यक्ष है एक नायक अप्रत्यक्ष और एक रहस्यमयी शक्ति है.

प्रथम नायक माननीय जज साहब है जिन्होंने एक न्यायाधीश की भांति कार्य किया ना कि किसी एक्टिविस्ट की भांति व्यवहार किया. माननीय ने इस अति दुसाध्य कार्य को साध्य करके दिखा दिया. जज साहब भारी दवाब के मध्य संविधान को कसकर पकड़े रहे और हर सुनवाई में ऐसे निर्णय सुनाए कि प्रजा का विश्वास आंखों में पट्टी बांधे खड़ी न्यायपालिका पर बना रहा. जज साहब को दवाब में लाने के लिए इकोसिस्टम ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया लेकिन पुष्पा स्टाइल में झुकेगा नही साला कहकर एक छोटे से कोर्ट के जज ने सर्वोच्च अदालत को भी कटघरे में खड़ा कर दिया.


द्वितीय नायक कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर रहे. ऐसा इसलिए क्योंकि कोर्ट ने इस सर्वे के पूर्व भी दो बार कमिश्नर नियुक्त किए लेकिन वे सभी सुरक्षा के डर से भाग खड़े हुए. जब कोर्ट ने वर्तमान कमिश्नर से पूछा तो वे बोले, उन्हें कोई डर नही है वे जान पर खेलकर सर्वे करने के लिए तैयार है. इसलिए विरोधी पक्ष ने इन्हें हटाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए लेकिन असफल रहे. यदि ये कमिश्नर भी जज के आगे मना कर देते तो सर्वे पुनः टल जाता.

तीसरे नायक योगीजी रहे. जब दो बार कोर्ट के आदेश के बाबजूद सर्वे नही हुआ तब योगी सरकार की भी किरकिरी हुई. जिस योगी सरकार की पहचान ही कानून व्यवस्था थी वह कोर्ट के आदेश का पालन तक नही करवा सकी. योगीजी ने जब मामले की रिपोर्ट मंगवाई तो पता चला वाराणसी प्रशासन ने भारी लापरवाही बरती. तब योगी खुद सर्वे के एकदिन पहले 13 तारीख को काशी आकर डेरा जमा लिए. उनके आते ही प्रशासन ऐसा चुस्त दुरुस्त हुआ जिसका परिणाम आज का सर्वे बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ.

चौथे नायक मोदीजी रहे जिन्हें शायद इसलिए ही माँ गंगा ने वाराणसी बुलाया था. विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनते ही मानो स्वयं गंगा पुकार रही है मेरे जल से मूल स्थान का जलाभिषेक किया जाए. मानो स्वयं भोले बाबा जागृत हो गए हो. जब स्वयं देश का राजा पूर्ण विधिविधान से विश्व सम्राट भोलेनाथ का पूजन करें तो मंगल होना ही है.

पांचवें नायक वकील विष्णु जैन रहे जिनके साहस के कारण मुकदमा यहां तक पहुंचा. ये वही वकील है जिन्होंने कुतुबमीनार से मूर्ति हटाने के ASI फतवे पर रोक लगाई. यही वकील वक्फबोर्ड के खिलाफ भी कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे है.

छठे नायक वे पांच महिलाएं है जिन्होंने कथित मज्जित में  पूजा की लड़ाई लड़ी. पांच शक्तियों ने पंचमक्कार इकोसिस्टम को उन्ही के सिस्टम से चुनौती देकर साबित कर दिया शक्तियां ही शक्तिपुंज हैं. याचिकाकर्ता महिलाओं पर मुकदमा वापिस लेने के लिए भारी दवाब बनाया गया लेकिन श्रृंगार गौरी की पूजा का मन मे विश्वास लिए शक्तियां अपने दृढ़ संकल्प से टस से मस ना हुई.

ये लड़ाई पंच शक्तियों की शक्ति(श्रृंगार गौरी) की पूजा करने के अधिकार पाने की लड़ाई है.
अंतिम नायक वो रहस्यमयी शक्ति है जिसका कोई आदि नही है. वे स्वयं बाबा विश्वनाथ है. जिन्होंने पहले वाराणसी में मोदी को बुलाया फिर योगी को. बाबा विश्वनाथ स्वयं बाहर निकलकर आना चाहते है जैसे स्वयं श्रीराम आये.

बस अब शेष सभी बाधाएं निर्विघ्न दूर हो जाए ताकि नंदी की प्रतीक्षा समाप्त हो जाए जो इस कार्य के ‘मौन’ नायक है.

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