दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का सफल समापन, हिन्दू राष्ट्र की मांग संवैधानिक अधिकार

बाऐंसें अधिवक्ता मदन मोहन यादव, श्री. सुभाष वेलिंगकर, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, श्री. रमेश शिंदे एवं श्री. जयेश थळी

विशेष परिसंवादों से विविध समस्याओं पर विचारमंथन और उपाय, दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में पारित हुए प्रस्ताव

कुछ वर्ष पूर्व तक ‘हिन्दू राष्ट्र’ इस शब्द की ओर तुच्छ दृष्टि से देखा जाता था; परंतु आज केवल भारत में ही नहीं, अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ‘हिन्दू राष्ट्र’ का उद्घोष होने लगा है । हिन्दू राष्ट्र का नारा जनसामान्य तक पहुंचाने में ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का महत्त्वपूर्ण योगदान है । इसी अधिवेशन के माध्यम से वर्ष 2012 में भारतभर के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का संगठन कर ‘हिन्दू राष्ट्र’ का उद्घोष किया गया था । दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ एक प्रकार से हिन्दू राष्ट्र की विजयादशमी ही है ।

हिन्दुओं के दमन का वनवास समाप्त होकर आनेवाले 3 वर्षो में रामराज्यरूपी हिन्दू राष्ट्र का सूर्याेदय होगा । 12 से 18 जून 2022 की अवधि में श्रीरामनाथ देवस्थान, रामनाथी, फोंडा, गोवा
में संपन्न हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन इसकी प्रतीति सिद्ध होगा । अमेरिका, हांगकांग, नेपाल, फिजी और इंग्लैंड सहित भारत के 26 राज्यों के 177 से अधिक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के 400 से
अधिक प्रतिनिधि इस अधिवेशन में उपस्थित थे ।

अमेरिका, नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों के धर्मप्रेमी हिन्दुओं ने ‘हम
हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का समर्थन करते हैं’, इस प्रकार के फलक हाथ में
लेकर हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का समर्थन किया है । समिति के ‘यू-ट्यूब’
चैनल *HinduJagruti*, तथा समिति के जालस्थल *www.hindujagruti.org
<http://www.hindujagruti.org>* से अधिवेशन का सीधा प्रसारण किया गया । 3
लाख 91 हजार से अधिक हिन्दुओं तक ‘ऑनलाइन’ माध्यम से यह अधिवेशन पहुंचा ।

    अधिवेशन में हिन्दू राष्ट्र के संबंध में ली जानेवाली आपत्तियों का
वैचारिक स्तर पर खंडन किया गया । ‘हिन्दू राष्ट्र की मांग हिन्दुओं का
प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकार है । वर्ष 2025 में हिन्दू राष्ट्र
स्थापित करने के लिए सब संगठित हों’, ऐसा आवाहन बीजवक्तव्य में किया गया ।
वर्तमान लोकतंत्र में हिन्दूहित साध्य नहीं किया जाता, अपितु हिन्दुओं का
दमन और अल्पसंख्यकों की चापलूसी की जा रही है । जिहादी, वामपंथी,
सेक्युलरवादी, नास्तिकतावादी और मिशनरियों का हिन्दूविरोधी गठबंधन सनातन
हिन्दू धर्म का दमन करने का प्रयत्न कर रहा है । इन हिन्दू विरोधियों को
पराजित कर हिन्दू राष्ट्र की आवाज बुलंद करने का निश्चय इस अधिवेशन में
किया गया ।

*विध्वंसित मंदिरों का पुनर्निर्माण* : इसके साथ ही मंदिरों को सरकारीकरण
से मुक्त कर उन्हें भक्तों को सौंपने के लिए किए जा रहे देशव्यापी अभियान
को गति देने का निश्चय भी इस अधिवेशन में किया गया । अयोध्या में
राममंदिर के निर्माण के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा स्थित
श्रीकृष्णजन्मभूमि पर भव्य श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की मांग भी देशभर में हो रही है ।

देश के अनेक मंदिर आज इस्लामी अतिक्रमण के कारण दब गए हैं । विध्वंसित मंदिरों
के पुनर्निर्माण के लिए जनमत तैयार करने सहित कानूनी स्तर पर भी संघर्ष
करने का निश्चय इस अधिवेशन में किया गया । काशी विश्वनाथ मंदिर की मुक्ति
के लिए कानूनी संघर्ष करनेवाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अधिवक्ता हरि
शंकर जैन भी इस अधिवेशन में सम्मिलित हुए थे । अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन
ने दृढ विश्वास व्यक्त किया कि ‘अब वह दिन दूर नहीं है, जब हिन्दू
एकत्रित आकर काशी विश्वनाथ मंदिर में श्री विश्वनाथ की पूजा करेंगे ।’

*     कश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वसन* : जिहादी आतंकवाद के कारण भारत में
विस्थापित होकर 32 वर्ष हो चुके हैं; परंतु आज भी कश्मीरी हिन्दुओं को
लक्ष्य कर उनका भीषण हत्यासत्र चल ही रहा है । आखिर कश्मीरी हिन्दुओं को
न्याय कब मिलेगा ? ऐसा प्रश्न कश्मीरी हिन्दुओं की ओर से अधिवेशन में
उपस्थित किया गया । ‘पनून काश्मीर’ नामक स्वतंत्र प्रदेश में कश्मीरी
हिन्दुओं का सम्मानपूर्वक पुनर्वसन करने की मांग का अधिवेशन में सम्मिलित
हिन्दुत्वनिष्ठों ने पूर्ण समर्थन किया ।

*     धर्मांतरण पर प्रतिबंध* : धर्मांतरण की भीषण समस्या के संबंध में
भी अधिवेशन में चर्चा की गई । धर्मांतरण की समस्या देशव्यापी होने के
कारण संविधान के अनुच्छेद 25 में सुधार कर उसमें से धर्म का ‘प्रचार
करना’ (Propagate) यह शब्द हटाने की मांग भी अधिवेशन में की गई । यह शब्द
हटाने के उपरांत धर्मांतरण रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कठोर कानून बनाया जाय ऐसा
प्रस्ताव पारित किया गया । धर्मांधों द्वारा किए जानेवाले दंगों,
आक्रमणों में देशभर के हिन्दुओं को लक्ष्य किया जा रहा है । इस पृष्ठभूमि
पर अधिवेशन में उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को आत्मरक्षा के लिए तैयार रहने
का आवाहन किया गया ।

*    हिन्दू राष्ट्र संसद* : ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ इस अधिवेशन की
विशेषता सिद्ध हुई । जिस प्रकार जनप्रतिनिधियों की संसद है, वैसी ही
धर्महित के विषय पर चर्चा करने के लिए अधिवेशन में 3 दिन
धर्मप्रतिनिधियों की प्रतीकात्मक ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ आयोजित की गई थी
। ‘मंदिरों का सुप्रबंधन’, ‘हिन्दू शिक्षा प्रणाली’ और ‘हिन्दू राष्ट्र
की स्थापना का संवैधानिक मार्ग’ आदि विषयों पर इन स्वतंत्र संसदों का
आयोजन किया गया था ।

आपातकाल की अवधि में संविधान में 42 वां संशोधन कर
जोडे गए ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द हटाए जाएं, कानून की प्रस्तुति
भारतीय संस्कृति के अनुसार हो, भारत के उज्ज्वल भविष्य और भारत को
विश्वगुरु बनाने के लिए धर्माधारित गुरुकुल शिक्षा दी जाए, हिन्दुओं के
मंदिर सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर भक्तों के नियंत्रण में दिए जाएं
आदि प्रस्ताव इस संसद में ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम्’ के जयघोष में
पारित किए गए ।

हलाल जिहाद ग्रंथ का लोकार्पण* : अधिवेशन में हिन्दू जनजागृति
समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे द्वारा लिखित मराठी और
हिन्दी भाषा की पुस्तक ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर नया आक्रमण : हलाल जिहाद
?’ का लोकार्पण किया गया । ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ का विरोध करने के लिए
आंदोलन करना निश्चित किया गया ।

दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में पारित हुए प्रस्ताव

: भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए, हिन्दुओं के मूलभूत अधिकारों
का हनन करनेवाला कानून ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ तत्काल निरस्त किया
जाए तथा काशी, मथुरा, ताजमहल, भोजशाला आदि मुगल आक्रमणकारियों द्वारा
हडपे गए हजारों मंदिर और भूमि हिन्दुओं को सौंपे जाएं, गोवा में
‘इन्क्विजिशन’ के नाम पर 250 वर्षाें तक गोवा निवासियों पर किए गए
अमानवीय और क्रूर अत्याचारों के लिए ईसाइयों के धर्मगुरु पोप गोवा की
जनता की सार्वजनिक क्षमा मांगें, भारत में ‘एफ.एस.एस.ए.आई.’(FSSAI) और
‘एफ.डी.ए.’(FDA) जैसी सरकारी संस्थाएं होते हुए धार्मिक आधार पर
‘समानांतर अर्थव्यवस्था’ निर्माण करनेवाले ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ पर तत्काल
प्रतिबंध लगाया जाए, राष्ट्रीय स्तरपर गोहत्या प्रतिबंधक कानून बनाया
जाए, पाकिस्तान, बांग्लादेश
और श्रीलंका के हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों का अन्वेषण अंतरराष्ट्रीय
मानवाधिकार संगठन और भारत शासन द्वारा किया जाए तथा वहां के अल्पसंख्यक
हिन्दुओं को सुरक्षा प्रदान की जाए, नागरिकता सुधार कानून कार्यान्वित
किया जाए आदि प्रस्ताव इस अधिवेशन में पारित किए गए ।

*     हिन्दू राष्ट्र के लिए वर्षभर कृति कार्यक्रम* : राष्ट्र और धर्म
रक्षा के विषयों पर कृति कार्यक्रम निश्चित करने के लिए इस अधिवेशन में
गुटचर्चा भी की गई । इसमें सैकडों हिन्दुत्वनिष्ठ सम्मिलित हुए । आनेवाले
वर्ष में हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के संबंध में समाज में जागृति लाने के
लिए समानसूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में बडी मात्रा में ‘हिन्दू
राष्ट्र जागृति सभा’, ‘हिन्दू राष्ट्र जागृति आंदोलन’, ‘हिन्दू राष्ट्र
अधिवेशन’, ‘हिन्दू राष्ट्र कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला’, ‘कश्मीरी
हिन्दुओं की समस्याओं पर सार्वजनिक सभा’, ‘हलाल जिहाद से संबंधित
जनजागृति बैठक’ आदि विविध उपक्रम कार्यान्वित करने का निश्चय इस अधिवेशन
में किया गया ।

     संक्षेप में, हिन्दुत्वनिष्ठों के अपूर्व उत्साह में संपन्न हुए दशम
‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में हिन्दू राष्ट्र के लिए
क्रियान्वित किए जानेवाले अभियानों को गति देने तथा विस्तार करने का
निश्चय किया गया ।

हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना केवल राजनीतिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक है, वह
रामराज्य पर आधारित है । वह साध्य करने के लिए अथक प्रयत्न करने का
हिन्दुत्वनिष्ठों ने किया हुआ निश्चय, अधिवेशन के माध्यम से मिला हुआ
धर्मतेज, देशभर के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का संगठन, उनमें उत्पन्न हुई
धर्मबंधुत्व की भावना को इस अधिवेशन की फलश्रुति कहनी पडेगी । कालमहिमा
के अनुसार हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होनेवाली ही है । इस कार्य में
तन-मन-धन समर्पित करने की प्रेरणा सबको मिले, ऐसी ईश्वर के चरणों में
प्रार्थना है ।

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