बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद पटना द्वारा जिहादियों के दबाव में अति प्राचीनकाल से चली आ रहे महंती परम्परा को समाप्त किया जा रहा

सरकार द्वारा नियम का पालन नहीं करते हुए रिटायर अधिकारी / प्रशासनिक अधिकारी को मठ / मंदिर का न्यासी नियुक्त कर अपने कब्जे में कर रही है

हनुमान जी वैष्णव है तो उनके दान से हास्पिटल में जहाँ गौमांस खाने, हिंदुओ को समाप्त करने की मंशा रखने वाले लोग हैं वैसे लोगो का इलाज और वो भी सब्सिडी देकर इलाज करना क्या ठीक है?

 

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद पटना द्वारा सुनिश्चित प्रकार से अति प्राचीन काल से चली आ रहे महंती परम्परा को समाप्त कर दिया गया है।

और जो बचा है उसे भी समाप्त करने का कार्य किया जा रहा है। संविधान की धारा 13 (3)क और धारा 25 से 28 इसका उलंघन है ये।
जैसे निम्नाकित महंत परम्परा को समाप्त किया गया उस मंदिर/ मठ कि सूची है जो अधिनियम की धारा 33 का उप धारा 2 में है कि 1 आधिन न्यासी के पद पर नियुक्ति में, पर्षद यथासंभव उस वर्ग के किसी व्यक्ति को चुनेगी जिस वर्ग का अंतिम न्यासी था, किन्तु बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद पटना द्वारा इस अधिनियम को नहीं पालन करते हुए रिटायर अधिकारी/ प्रशासनिक अधिकारी को न्यासी नियुक्त करता है, जो निम्नलिखित है।
हरिहर नाथ मंदिर, सोनपुर, सारण बिहार, के अंतिम महंत अवधकिशोर गिरी,
शिलनाथ महादेव मंदिर, सिल्हौरी, मढौरा सारण बिहार अंतिम महंत शिवानन्द गिरी, जो अभी जिवित है,
कैथवलिया मठ, कल्याण पुर, पुर्वी चम्पारण बिहार अंतिम महंत दिनदयाल गिरी अभी जिवित है,।इस सन्यासी परम्परा को समाप्त कर जाली कागज तैयार कर महावीर मंदिर पटना में मिलाया गया है।
इस्माइलपुर मठ, बिदुपुर वैशाली बिहार अंतिम महंत रामगोपाल दास जी छल से विश्व का सबसे ऊंचा राम मंदिर बनाने के नाम पर इस स्थान के महंत परम्परा को समाप्त कर महावीर मंदिर पटना में मिलाया गया है।
इस प्रकार के बिहार में बहुत से स्थान है जहाँ छल कपट कर के स्थान से साधुशाही परंपरा समाप्त किया गया है और किया जा रहा है।
मानवाधिकार कि बात यह भी है
बोर्ड में आनेवाले न्यासधारी साधुओं के साथ अपमान जनक व्यवहार होता है।
बाथरूम लैट्रिन का प्रबन्ध बोर्ड में नहीं है, तथा दुरदराज से आने वाले साधु संत को बहुत दिक्कत होता है,
महंत दुर दराज से बोर्ड में आता है और उसका सुनवाई शाम चार बजे तक होने के दशा में उस महंत को फुटपाथ पर रात्रि गुजारना पड़ता है।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास अधिनियम कि धारा 71 का उप धारा ज्ञ में है कि— इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन में पर्षद द्वारा किया गया किसी अन्य व्यय के भुगतान पर जिसमें राज्य के किसी पौराणिक या ऐतिहासिक मन्दिर/ मठ के रख- रखाव मरम्मत या विकास पर व्यव और सुसंगत परिचारिकाओं या पुस्तकों के प्रकाशन या सी0 डी0 या धार्मिक न्यासों के वृत्तचित्र के निर्माण के खर्च भी शामिल होंगे।
इस कानून को नहीं मानते हुए महावीर मंदिर पटना जंक्शन पटना द्वारा बिहार से बाहर करोड़ों रुपये वर्ष मे खर्च और दान दिया जाता है किन्तु बिहार में दयनीय हालात के मठ मन्दिर को कोई सहयोग नहीं किया जाता है।, उल्टा उनके सभी सम्पतियों को महावीर मंदिर में मिला लिया जाता है।
श्री हनुमान जी परम् वैष्णव है तो उनके चढ़वा के रुपये से मेडिकल हास्पिटल में मुसलमानों का इलाज करना क्या ठीक है?
जहाँ अंडा, मछली और गौमांस खाने वाले और हिंदुओ को समाप्त करने की मंशा रखने वाले लोग रहते हैं और बढ़ावा देते हैं वैसे लोगो का इलाज और वो भी सब्सिडी देकर क्यों?
चलो कोई बात नही मानवता के नाते कर रहे है किंतु राज्य में रहने वाले साधु संतों पुजारियों का इलाज फ्री में क्यों नही ?
इस अधिनियम की धारा के तहत कमजोर स्थानो को और वहां सेवा करनेवाले साधु संत पुजारी महंत को सहयोग मिलना चाहिए था।
लेकिन ऐसा नही है ।बिहार में रहने वाले न्यासधारी साधु संत महंत अब ऐसा नही हो इसके लिए आवाज उठाये नही तो आने वाले समय मे हमारी ये साधुशाही परंपरा समाप्त हो जाएगी
🇮🇳🚩 जय सियाराम 🚩🇮🇳

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