कबतक रहेंगे झारखंड के गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित

विशद कुमार

इससे अधिक झारखंडी जनता के लिए और क्या दुर्भाग्य हो कि आजादी का 75 वर्ष बाद और झारखंड अगल राज्य गठन के 22 वर्ष होने के बाद भी झारखंड के लगभग गांव विकास की रौशनी से आज भी महरूम है।

सड़क हो या बिजली, पेयजल की सुविधा हो या कृषि के लिए सिंचाई की व्यवस्था, ये तमाम सुविधाएं नदारद तो हैं ही साथ ही जनाकांक्षी योजनाएं जैसे वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, स्वास्थ्य केंद्र, आदिम जनजातियों के लिए बिरसा आवास सहित  मुख्‍यमंत्री डाकिया योजना (जिसके तहत आदिम जनजातीय परिवारों को बोरा बंद 35 किग्रा. चावल घर पहुंचाने की बाध्यता है) का लाभ भी लोगों नहीं मिल पा रहा है। जिसको लेकर आए दिन अखबारों में बनती हैं, विरोध प्रदर्शन होते हैं, संबंधित विभागों को शिकायतें भेजी जाती हैं, बावजूद सिस्टम के कान पर जूं तक नहीं रेंगता।

इन खबरों के बीच बताते चलें कि झारखंड के दुमका जिला अंतर्गत मसलिया प्रखंड की सुग्गापहाड़ी पंचायत के पहाड़िया और संताल आदिवासी बाहुल्य आमगाछी पहाड़ गांव में झारखंड राज्य गठन के 22 साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में आज तक एक बार भी बिजली नहीं जली।
गांव में पांच से अधिक टोला है, जो दूर-दूर स्थित है। इस गांव में करीब 80 घर हैं।
10 साल पहले गांव में ट्रांसफार्मर, पोल और तार लगाये गये थे, लेकिन आज तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।

इस बावत ग्रामीण बताते हैं कि आठ वर्ष पूर्व गांव में बिजली चालू करने के लिए बिजली मिस्त्री हम सभी ग्रामीणों से 50-50 रुपये की मांग की थी। लेकिन अधिकांश ग्रामीण पैसा देने में असमर्थ थे। इसलिए आज तक गांव में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, वोट मांगते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बिजली नहीं होने के कारण काफी परेशानी होती है। ग्रामीण सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज करते हैं, वहीं जिसके पास सोलर प्लेट नहीं है, वो अपना मोबाइल पहाड़ के नीचे के दूसरे गांव जाकर और पैसे देकर चार्ज करवाते हैं। कुछ ग्रामीण चार्ज बैटरी से LED लाइट जलाते हैं. इसी लाइट से रात्रि में बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन LED लाइट एक चार्ज में मात्र डेढ़ से दो घंटे ही चलता है।

ग्रामीणों ने कहना है कि “आपकी सरकार- आपके अधिकार, आपके द्वार” कार्यक्रम के दौरान सुग्गापहाड़ी पंचायत में जनप्रतिनिधियों को दिसंबर 2021 में ही लिखित आवेदन दिया गया था, पर छह माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों ने कहना है कि अगर जल्द ही बिजली आपूर्ति सेवा बहाल नहीं हुई, तो हम सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

  वहीं दूसरी तरफ राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिला का फुलकुरिया गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ना तो सड़क है और ना ही पेयजल और चिकित्सा  की कोई सुविधा। इसके बावजूद इस गांव का सुध लेने की चिंता किसी को नहीं है। परेशान ग्रामीण आज भी किसी ही रहनुमा के इंतजार में हैं।

फुलकुरिया गांव बहरागोड़ा प्रखंड की कुमारडुबी पंचायत के तहत आता है। इस गांव में करीब 50 घर बने हुए हैं, जिनमें करीब 300 सदस्य रहते हैं। ये लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। इस फुलकुरिया गांव में सड़कें नहीं हैं। चिकित्सा की कोई उचित सुविधा नहीं है। पानी के लिए एकमात्र साधन सोलर पंप है। इसी पंप के सहारे ग्रामीण प्यास बुझाने को विवश है। पूर्व में बने बोरवेल सूख चुके हैं।

फुलकुरिया गांव को पांचांडो सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए एक पुल निर्माण की मांग सालों से चली आ रही है, लेकिन आज तक समाधान नहीं निकला है। आज भी ग्रामीणों के लिए कच्ची सड़क ही आवागमन का एक मात्र साधन है। सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है। कच्ची सड़क होने के कारण आवागमन में काफी परेशानी होती है। गांव में बीमार पड़े लोगों को चरपाई के सहारे मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है।

इतना ही नहीं, गांव के बुजुर्ग ग्रामीण वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास के लिए सरकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। कई ग्रामीणों को अब तक ये सुविधा भी नसीब नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने अधिकारियों से कई बार अन्य गांवों की भांति इस गांव में भी मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान देने की अपील की है। लेकिन रिजल्ट सिफर रहा है।

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