एनटीपीसी कहलगाँव के तानाशाह रवैया एवं लापरवाही के वजह से आसपास के लोगों की जीवन खतरे में

ना खाना शुद्ध मिल रही है, ना पानी और ना ही हवा। ऐसी स्थिति में कब तक जी पाएंगे आसपास के लोग अपनी जिंदगी?

अवध किशोर कुमार भोलसर, एकचारी, कहलगांव भागलपुर

मैं इस पत्र के माध्यम से तमाम पदाधिकारी और सरकार का ध्यान एनटीपीसी कहलगाँव के तानाशाह रवैया एवं लापरवाही की ओर आकृष्ट कराने की कोशिश कर रहा हूँ। एनटीपीसी कहलगाँव के तानाशाह रवैया एवं लापरवाही के वजह से आसपास के लोगों की जीवन खतरे में है। ना खाना शुद्ध मिल रही है, ना पानी और ना ही हवा। ऐसी स्थिति में कब तक जी पाएंगे आसपास के लोग अपनी जिंदगी? एनटीपीसी किसी के लिए वरदान तो आसपास के आम जनमानस के लिए अभिशाप साबित हो रही है।

एनटीपीसी के पश्चिमी भाग में बने ऐश डाईक की ऊंचाई इतनी अधिक कर दी गई है कि जब हवा के झोंके चलते हैं तो ऐश अर्थात राख उड़कर आसपास के गांवों में करीब आधा इंच मोटा परत जम जाता है। उस समय आसपास करीब 50 मीटर की दूरी दिखना मुश्किल हो जाता है। यहां के लोग खाने में राख और पानी के साथ भी राख ग्रहण करने को मजबूर है।

जिससे कहलगाँव शहर और आसपास के गाँवों में लोग हृदय रोग, कैंसर, श्वसन रोग एवं स्ट्रोक जैसे जानलेवा बीमारी के शिकार भी हो रहे हैं। एनटीपीसी कहलगाँव अपने ऐश डाईक में राख को हमेशा भिगोकर रखें या फिर उस पर कई तरह के पेड़ लगा दे तो शायद इस समस्या का निदान हो सकता है तथा पेड़ लगाने से पर्यावरण भी शुद्ध होगा।

दूसरी तरफ एनटीपीसी के चिमनी से निकलने वाली धुआ आसपास के करीब 25 किलोमीटर की परिधि तक के पर्यावरण को प्रदूषित कर रही है। यह धुआ प्राकृतिक सौंदर्य को नष्ट और आम जनमानस के जीवन में कष्ट दे रही है।

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